मत्ते नाना *********


Meena Sood Posted: November 14 ,2014

बात तब की है जब काजल क़रीब डेढ़ साल की थी। अभी उसने तुतलाते हुए बोलना शुरू ही किया था परन्तु फ़िर भी उसकी पटर-पटर दिन भर चलती थी।

 

उन्हीं दिनों उसे लेकर मैं अपने मामाजी के घर उनसे मिलने गयी। मामाजी अभी ऑफिस में ही थे। मामीजी और बाकी सब घर पर थे। हम सब दोपहर का खाना आदि निपटाकर, कमरे में बैठकर बातें करने लगे। इधर उधर की चर्चाओं के साथ ही चाय का समय भी हो आया था। काजल भी वहीँ आस पास खेल रही थी। तभी मामाजी का ऑफिस से फ़ोन आया। मेरी बात होने के बाद मामीजी ने फ़ोन लिया और काजल को गोद में लेकर उसकी तोतली बातें उसके नाना को सुनवानी चाहीं। काजल ने नानी के हाथ से फ़ोन खींच कर खुद कान से लगाकर, तोतली आवाज़ में कुछ कुछ कहा। तभी मामीजी ने बोला कि चलो पहले नाना को नमस्ते करो। बोलो "नमस्ते नाना"!

 

ये सुनकर काजल ने फ़ोन छोड़कर बड़ी मासूमियत से अपने दोनों हाथ जोड़ दिए और कहा "मत्ते नाना"!

 

ढप्प की आवाज़ आते ही हम सबका ध्यान उसकी बातों से हटकर नीचे गिरे फ़ोन पर गया। ऐसा पल था कि उस पर गुस्सा बिलकुल नहीं आ रहा था बल्कि उसकी मासूमियत पर और अधिक लाड़ आ रहा था। आज काजल 15 साल की है पर आज भी उसकी वो "मत्ते नाना" हमारे चेहरों पर मुस्कान ले आती है और हमारे साथ-साथ आज वो भी खिलखिलाती है।  





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