Writing Contest- No 3


Meena Sood Posted: October 23 ,2014

कुछ यूँ दिवाली मनायें 

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पूजा थाल लिए हाथों में 

दीये आशाओं के हृदय में जलायें 

आओ दिवाली मनायें। 

 

दीपावली की शुभ घड़ियों में 

चलें आज उन झोंपड़ियों में 

जहां तरसता आज भी बचपन 

कुछ फुलझड़ियों उनको देकर  

उल्लास के दीपक जलायें 

आओ दिवाली मनायें।

 

जहां थके थके से पाँव हैं 

कुछ बोझिल सी सांस है 

मायूसी की उन गलियों में 

जीवन का नव साज बजाएं 

आओ कुछ सपने दे आएं 

आओ दिवाली मनायें।

 

इक उम्र से नहीं देखा सावन 

नहीं भोगा कब से ये फागुन 

कच्ची होती रिश्तों की डोर को 

मजबूती के धागों में पिरोएँ 

आओ कुछ बंधन जोड़ आएं 

आओ दिवाली मनायें।

 

जहाँ नहीं दीयों में उजास है 

जहाँ दूर घर का चिराग़ है 

उस सीमा प्रहरी के घर चल

झुकते काँधों का सहारा बन जाएँ  

बूढ़ी आँखों में प्राण ले आएं 

आओ दिवाली मनायें।

 

कितना ही समय बीत गया  

जग में सबसे मिलते जुलते 

कुछ ऐसा वक़्त निकालें अब 

कि ख़ुद को भी पा जाएँ 

आओ कोई नया गीत गायें 

आओ दिवाली मनायें।

 

सारी उम्र संवारा ये तन 

भावों से यूँ विह्वल हुआ मन 

संकल्प ले इस जीवन को 

इसकी सही दिशा दिखाएँ  

कि कलयुग के राम कहलायें। 

आओ दिवाली मनायें। 





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