Woh Jahaan...


Vikas Posted: January 24 ,2014

जहाँ पे वस्ल ज़मीं आसमाँ का होता है
और एक शफ्फ़ाफ़ समंदर हिलोरें लेता है
 

जहाँ दिन और रात साथ साथ रहते हैं

हर तरफ महकी हवाओं के झोंके बहते हैं
 

घुली रहती हैं रोशनी की बूँदें पानी में

जहाँ ठहरी हुई है ज़िंदगी रवानी में
 

कुछ ऐसा ही एक जहाँ है मेरे ख्वाबों का

उसी ख़्वाबों के जहाँ में मैं मिलूँगा तुमको
मुझे हर रात निगाहों में ले के सोना तुम...





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