वो खेल का मैदान...


Vikas Posted: February 04 ,2014

आँखें जब सुबह की रोशनी से पहले खुलती थी

हक़ीक़त से चुरा लेते थे जाने ख़्वाब कितने ही

हाथों में क्रिकेट का बैट एक हथियार लगता था

बचपन जब बड़ी मासूमियत से जंग लड़ता था 

 

वो बचपन दे के आवाज़ें मुझे अक्सर बुलाता है

मुझे वो खेल का मैदान अब भी याद आता है





Related Stories

Designed By: Web Solution Centre