अश्क़


Vikas Posted: January 21 ,2014

यकायक बह चला है आज एक तेज़ाब पलकों से

झुलस कर गिर रहे हैं बेतहाशा ख्वाब पलकों से

 

मिज़ाज-ए-चश्म-ए-तर हैराँ किए जाए है अब मुझको

कभी सेहरा बरसता है, कभी सैलाब पलकों से





Related Stories

Designed By: Web Solution Centre