सुनहरी रात


Nitish Bakshi Posted: January 08 ,2014

गुज़र गया दिन,

चौखट पे खड़ी रात है !

झरोखे से झाँकती,

तारों की बारात है !!

दर-ओ-दीवार करने रोशन,

चाँद-चाँदनी आयेंगे !

सुनहरे कल की तस्वीर,

आज नए सपने दिखाएँगे !





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