तेरी आँखे


Vikas Posted: January 27 ,2014

 

तेरे दिल के मिज़ाजों को करें ज़ाहिर तेरी आँखें 

कभी हैराँ, कभी नादाँ, कभी शातिर तेरी आँखें 

 

बिना अल्फ़ाज़ के करती हैं अफ़साने बयाँ कितने 

हैं इस जादूगरी में ख़ूब ही माहिर तेरी आँखें 

 

मैं ख़ुद को ही भुला बैठा जो डूबा एक दिन इन में 

असर मुझ पर कोई कर ही गयी आख़िर तेरी आँखें 

 

बातों बातों में फ़िर ज़िक्र आया है क़यामत का 

न जाने क्यों मुझे याद आ रही हैं फ़िर तेरी आँखें





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