बारिश की बूँदें


Vikas Posted: January 21 ,2014

चुपके से ज़हन में तेरी यादें लौट आती हैं,

मेरी खिड़की पे जब बारिश की बूँदें खटखटाती हैं 

 

हमेशा साथ बारिश के कई  पैग़ाम आते हैं

बादल आसमाँ से ढेर सारे ख़त गिराते हैं

 

झरोखों से हवायें जब कभी छन कर ग़ुज़रती हैं

अलग अपनी किसी लय में तेरा ही ज़िक्र करती हैं

 

बड़ी ही देर तक फ़िर गूँजती रहती है कानों में

वही एक नज़्म जो कर हवायें छोड़ जाती हैं

 

जाने क्यों ज़हन में तेरी यादें लौट आती हैं,

मेरी खिड़की पे जब बारिश की  बूँदें  खटखटाती हैं





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