तन्हा सफ़र


AdminPosted: December 30 ,2013

मेरी ज़िन्दगी मेरी रही

मेरा दर्द भी मैं ही हूँ

मेरी ख्वाहिशें मेरा जूनून मैं

तमाम तबस्सुमें भी मैं ही हूँ

कोई मुझ सा नहीं मेरे जहाँ में

मेरा अक्स भी मैं ही हूँ

मेरी राह में कोई राही नहीं

मेरा हमसफ़र भी मैं ही हूँ

तेरा शुक्रिया तूने पल दो पल

इत्मिनान से मुझे सुन लिया   

तू हबीब कुछ देर मेरा हुआ

मेरे साथ राह में चल दिया

मेरी शब्--दास्ताँ मेरी रही

मेरी आख़री सहर भी मैं ही हूँ

मेरी ज़िन्दगी मेरी रही

मेरा दर्द भी मैं ही हूँ

 

Life is a journey alone, a journey of pains that you bear on self, the journey of smiles that you make for self. The people, who walk beside in phases and stages, are the generous souls who bestow their love. 





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