“अभी अभी”


Deeksha Posted: May 09 ,2014

इक बूँद गिरी है अभी अभी

इक लहर बनी है अभी अभी

इक धड़कन हुई बेख़ौफ़ ज़रा

इक साँस तनी है अभी अभी

नैनों के कोरे झुरमुट में

कोई बैठा पंछी गिनता है

उस बेदर्द की मेरे काजल से

आ बात ठनी है अभी अभी

कुछ धीमे धीमे बोलो तुम

ज़रा चुप के बातें खोलो तुम

वो सुन लेगा जो रोया है

जागा सारी रात...अब सोया है

उस की बिरहन सी रातों ने

एक सुबह जनी है अभी अभी

इक बूँद गिरी है अभी अभी

कोई लहर बनी है अभी अभी

Life is just like ripples in water. Do not suppress them that would hurt you inside. There is quietness in ripples; there is a strange clamor too. Each ripple gives a color of its own. Make a beautiful picture!

 

 





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