मेरा ही नाम पृथ्वी है


Mukesh Beniwal Posted: February 08 ,2014

मुझे दबा दो तुम गहरे गढ्ढों में
सुला दो तुम मुझे कंटीले बिस्तरों पर
रख दो
मुझ पर पत्थर  …
रख देना जमीन की आखरी तह में मुझे तुम

कल को याद आये मेरी

तो तुम कुछ कर ना सको

सिवाय अफसोस के

ओर हां

आते-जाते किसी को

नजर भी ना आयेगी
मेरी छोटी सी देह …

दिख गयी मैं आते-जाते किसी
तोहिन बड़ी होगी तुम्हारी

राहत मिले तुमको

मेरी ये छोटी सी जिन्दगी मिटाने पर


राहों पर आये तुम्हारी जिंदगी
मुझे मिटाने से

मुझे खुशी और क्या होगी इससे ज्यादा

तुम्हारे लिये तो हजार जन्म तैयार है मेरे…

गिला तुमसे नही है मुझे उस कोख से है
बदला लिया होगा मुझसे उसने किसी गहरी रंजिश का

या मुझसे गहरा है उसका रिस्ता मेरे भाई से…
दिन वो दूर नहीं है हालात ये रहे तो…

सुरज की रोशनी चाँद की चाँदनी
महकती हवा मीठा पानी नसीब ना होगा


मैं ही तो दिखाती हूँ

तुम्हें ये सुन्दर संसार


तुम्हारे लिये मैं बेटी

मेरा ही नाम पृथ्वी है

………………मुकेश बेनीवाल

 

नोट: चित्र गूगल से





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