तन्हाई


Vikas Posted: January 29 ,2014

बहुत तन्हा सफ़र है, रास्ते वीरान दिखते हैं

मुसाफ़िर जो भी मिलते हैं, बड़े अन्जान दिखते हैं

 

अभी भी दिख रहे हैं फूल मुरझाए से कुछ बाक़ी

किसी गुज़रे हुए मौसम का ये एहसान दिखते हैं

 

इमारत बन गयी है एक किसी बुनियाद--गुलशन पे

नये घर ख़ूबसूरत और आलीशान दिखते हैं

 

अंधेरों में जाने कब से मेरे हौसले हैं दफ़्न

ज़रा सी रोशनी आती है तो हैरान दिखते हैं





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