किसी दिन फ़ुरसत मिली तो सोचेंगे...


Charu Posted: January 27 ,2014

किसी दिन फ़ुरसत मिली तो सोचेंगे...


की तुझे पाने की ख़ुशी ज़्यादा थी या फिर से खो देने का ग़म

की जहां में मसरूफ़ तुम ज़्यादा थे या खुद में मगरूर हम


की कच्चे तेरे वादे ज़्यादा थे या झूठी मेरी क़सम 

की हावी ये जहां ज़्यादा था या हल्के मेरे क़रम


की टूटे दिल की आवाज़ ज़्यादा थी या जर्जर होते भरम

मेरे इस भरम को ना तोड़ते तो ही अच्छा था


किसी दिन फ़ुरसत मिली तो सोचेंगे...

 





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