कह दो बस...


Deeksha Sonia Posted: January 11 ,2014

जो भी सोच है ज़हन में
बेपरवाह कागज़ पर उतार दो 
कुछ गिरवी करो वक़्त 
कुछ ज़िन्दगी से उधार लो 
उधार लो कुछ लम्हे 
जो अब तक नहीं जन्मे 
उन लम्हो में भर कर 
ज़िन्दगी को प्यार दो 
रात क़ाफ़िर है 
मुद्दा बेखुदी का है 
गुज़र जाने से पहले 
मोहब्बत गुज़ार दो 
जो भी सोच है ज़हन में
बेपरवाह कागज़ पर उतार दो 
कुछ गिरवी करो वक़्त 
कुछ ज़िन्दगी से उधार लो 

 

- deeksha sonia 





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