मेरी माँग


Vijaya Gowrisankar Posted: November 08 ,2014

माँ, में खेलना चाहता हूँ 

खूब सारे खिलौने ला दो 

नए खिलौने, हर दिन के लिए

नए खेल, हर पल के लिए....

 

गंदे हाथों और कपड़ों को मत देखो

मेरे नटखटपन को मत रोको

मेरी बदमाशी को मत टोको

सिर्फ मेरी ख़ुशी को देखो...

 

खाना क्यों है खाना?

मुझे तो सिर्फ है खेलना

स्कूल के लिए क्यों है उठना?

स्कूल तो सिर्फ मुझे है जाना

मस्ती करते करते मुझे है सीखना

होमवर्क नहीं है मुझको करना.....

 

माँ, तुम मुझे समझती क्यों नहीं?

नहीं करता मैं तंग तुझे

सिर्फ समय चाहता हूँ तुझसे

खूब सारा संग खेलेंगे.....

 

जब मैं बड़ा हो जाऊंगा

अपनी काम में मस्त हो जाऊंगा

दोस्तों के संग खेलूँगा.....

 

फिर तुम सारा काम करना

और खूब आराम करना

तब तक तो मेरे संग खेलना

वादा? पक्का वादा.....





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