तुम्हारी याद


Vikas Posted: March 03 ,2014

बारहा तुमको भूलने की कोशिशों में हम

हर घड़ी तुमको याद किए जाते हैं

 

कभी तन्हाई में खामोश बैठते हैं, कभी

बेख़ुदी में तुम्हारा नाम लिए जाते हैं

 

एक ख़लिश ने न जाने दिल पे कितने ज़ख़्म किए

फुर्सतों में उन्ही ज़ख़्मों को सिये जाते हैं

 

तुम मेरे हो न हो सकोगे, लेकिन

किसी अन्जान सी ख़्वाहिश में जिए जाते हैं





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