ऐश ट्रे


Vikas Posted: February 02 ,2014

ड्राइंग रूम की ठहरी हवा के जिस्म पर

धुएँ की एक गर्म शॉल पड़ी हुई है

बाहर की मंद रोशनी को हसरत से देखती

एक मायूस सी खिड़की आधी खुली हुई है

खामोशियाँ शोर करती है अब

चीखती पड़ती हैं यकायक

बुलाती होंगी शायद उन गुज़रे हुए पलों को वापस

 

जिनकी लाशों से पूरी ऐश ट्रे भरी हुई है...





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