बेगानगी


Vikas Posted: January 28 ,2014

ज़मीं खोने लगी मुझसे, रहा न अब फ़लक मेरा

पराया लग रहा है क्यों रहा जो आज तक मेरा

ये अब महसूस होता है मैं ख़ुद से ही नहीं वाक़िफ़

कि जैसे खो दिया हो मैंने अब ख़ुद पर से हक़ मेरा





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