--@ एक सुखद एहसास @--


Payal Agarwal Posted: January 18 ,2014

कई दिनों बाद आज दिखी धूप 

हलकी सी नरम सी 

गुनगुनी 

शायद उतरायन का दैवकृत संकेत 

उतने ही दिनों से हाड़ कपकपाती 

शीत के बाद जैसे कोई जन्नत 

 

पूरा मोहल्ला जो सिमटा था अपने अपने 

घरौंदे में --- था बाहर 

अपने चीर-परिचित गति में लौटता हुआ 

 

वो गुनगुनाती सी धुप जैसे कोई लोरी सुना रही थी 

पलकें भारी होने लगी 

बस 

बगल में बैठी माँ के गोद में 

यूँ ही सर टिका दिया अपना 

मुद्दे बाद 

बड़े होने के बाद ये प्रवृति कम ही हो जाती है न 

 

और 

बस तभी सामान्यतः 

माँ का वो सहज ही 

सर पे हाथ फेरना 

हलकी सी थपथपी 

 

आहा ! 

वो सुकून भरी झपकी 

सब कुछ बिसरा दे … 

 

काश 

ये लम्हा कुछ समय के लिए वही थम जाता 

ज़िन्दगी नरम -गर्म सी 

कुछ अंतराल के लिए 


ऐसी ही सुखद रह जाती … !

 

-- पायल  -- 

 

 





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